बदली सोच तो 60 फीसद लोग अपनाने लगे शौचालय

बाराबंकी : संसाधन होने भर से परिवर्तन नहीं लाया जा सकता। इसके लिए सोच में भी बदलाव जरूरी है। इसीलिए शौचालय बनवाने के साथ ही सरकार ने विभिन्न स्तर पर कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक भी किया। इसी का असर है आज जिले में बने करीब पौने पांच लाख परिवार को मिले शौचालय में से 60 फीसद न सिर्फ शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं बल्कि दूसरों को भी जागरूक कर रहे हैं। प्रस्तुत है रिपोर्ट-:


स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2014 से 2018 तक तीन लाख 81 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया। 2019 में जनवरी से अब तक छूटे परिवारों को शौचालय दिया गया है। सर्वे में छूटे परिवारों के लिए भी शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। पूरे जिले को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। 2014 से पहले गांव के लोग शौचालय बनाने और उनके प्रयोग से बचते थे।


सबसे पहले हुए ओडीएफ गांव : ओडीएफ हुए गांव नंदनाकला, चंदवारा, इसराहना, चककोदर, रीवासीवां, गदाईपुर, चकरौलिया, हिदायतपुर गांव बाराबंकी के पहले गांव हैं, जिसे खुले में शौच मुक्त गांव हुए। यहां ग्रामीणों ने खुद से शौचालय बनाकर नजीर के तौर जाने गए। यहां के रहने वाले कौशल, विपिन, रामलखन और बनीकोडर के पूरेगिरधर के अर¨वद पांडे, कल्प नारायण ने बताया कि पहले संकोचवश शौचालय नहीं बनवाए थे। बाद में वह शौचालय बनाकर अब उसका शतप्रतिशत प्रयोग कर रहे हैं। रामखेलावन बताते हैं कि उनकी पूरी उम्र बाहर खुले में शौच जाते गुजर गया। सरकार की स्वच्छता अभियान प्रचार से हम प्रभावित हुए और खुद से शौचालय बनवाया।


लाख जिले की कुल आबादी


लाख परिवारों को मिले शौचालय


हजार शेष बचे लगभग


त्रिवेदीगंज क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव में बने मॉडल शौचालय के बाहर खड़े दंपती और मसौली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चंदवार में बना मॉडल शौचालय 'जागरण


सवा दो लाख परिवार ने खुद कराया निर्माण


जिले में सवा दो लाख परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी योजना के तहत मिल रहे 12 हजार का अनुदान नहीं लिया है। इन लोगों ने खुद से शौचालय बनवाकर नजीर पेश की है।


गांवों में कुछ परिवार अभी शौचालय पाने से छूटे हुए हैं, उन्हें शौचालय के लिए पैसा दिया जा रहा है। जिन्हें शौचालय मिला हैं, उसमें अधिकांश लोग शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं। '


मेधा रूपम, मुख्य विकास अधिकारी, बाराबंकी।