200 परिवारों को राशन सामग्री का वितरण


लखनऊ। विज्ञान फाउंडेशन द्वारा दशरा संस्था के सहयोग से बैक द फ्रंटलाइन इनीशिएटिव के तहत मंगलवार को पल्टन छावनी अलीगंज स्थित रैनबसेरा परिसर में 100 जरूरतमंद परिवारों को सूखे राशन किट का वितरण किया गया। इसीप्रकार प्रयागराज में भी 100 जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री वितरित की गई। 

विज्ञान फाण्डेशन के श्री संदीप खरे ने बताया कि कोविड रीलीफ कार्यक्रम के तहत लखनऊ तथा प्रयागराज शहर की गरीब बस्तियों, श्रमिक बस्तियों में 200 ऐसे लोगों का सर्वे किया गया जो काफी जरूरतमंद थे। सर्वे के दौरान प्रवासी महिला श्रमिक, विधवा, विकलांग , परित्याक्ता व ट्रांसजेंडर समुदाय से आने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई। सर्वे के दौरान चयनित सभी लाभार्थियों को पल्टन छावनी रैन बसेरा पर बुलाकर राशन सामग्री का वितरण किया गया।


विज्ञान फाण्डेशन के गुरूप्रसाद ने बताया कि राशन वितरण से पूर्व लखनऊ की 25 बस्तियों तथा प्रयागराज की 20 बस्तियों में तमाम ऐसे परिवार मिले जिनके पास दीपावली जैसे त्यौहार में राशन सामग्री जुटा पाना काफी मुश्किल था ऐसे समय में बैक द फ्रंट लाइन इनीशिएटिव कार्यक्रम के तहत 200 परिवारों को पांच किलो आटा, पांच किलो चावल, 1 किलो चना दाल, 1 किलो अरहर, दाल , 1 किलो सूजी, 1 किलो नमक, 2 किलो रिफाइण्ड ऑयल, 2 किलो चीनी, 250 ग्राम चाय पत्ती, 250 ग्राम सब्जी मसाला, 3 रिन साबुन, 3 डिटॉल साबुन आदि से सम्मलित किट उपलब्ध करवाया गया। सुबह करीब साढ़े दस बजे से किट वितरण शुरू किया गया अपराह्न 2 बजे तक सभी लाभार्थियों को किट उपलब्ध करा दिया गया। 

जरूरतमंद लोगों को राशन किट मिली तो उनके चेहरों पर राहत की झलक साफ दिखी। सभी लाभांवितों ने एक सुर में विज्ञान एवं दशरा संस्था की इस पहल का स्वागत व प्रशंसा की। इस दौरान घरेलू कामगार नीतू ने बताया किहमारे परिवार में कमाने वाला और कोई दूसरा नहीं है 4 बच्चे हैं दूसरों घरों में चूल्हा चौका करके जो थोड़ा बहुत पैसा मिलता है उसी से बच्चों को स्कूल भेजते हैं ऐसे हालात में दीपावली त्यौहार में राशन व अन्य सामग्री खरीदने के लिए हमारे पास कोई पैसे नहीं थे राहत सामग्री मिलने से त्योहार अच्छे तरीके से मना सकेंगे। 

इस दौरान राशन वितरण कर रही टीम का भी सभी ने शुक्रिया अदा किया। वितरण कार्यक्रम में अमरसिंह यादव, राम रक्षा यादव, शाहब बख्स सिंह ,जितेंद्र मौर्य मोहमद अनस आदि लोग उपस्थित रहे।